मध्य प्रदेश

Mandsaur: करोड़ों पेड़ों से लाखों लोगों को जीवनदायिनी ऑक्सीजन

Admindelhi1
21 April 2026 11:11 AM IST
Mandsaur: करोड़ों पेड़ों से लाखों लोगों को जीवनदायिनी ऑक्सीजन
x

मंदसौर: महानगरों में जहां लोग ‘एयर क्वालिटी इंडेक्स' के खतरनाक स्तर और जहरीली हवा से जूझ रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश के मंदसौर और नीमच जिलों की सीमा पर फैला गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य एक विशाल ‘ऑक्सीजन पावर बैंक' बनकर उभरा है।

.1984 में अधिसूचित 368.62 वर्ग किमी टर में फैला यह अभयारण्य न केवल वन्यजीवों की सुरक्षित शरणस्थली है, बल्कि यह हर साल लाखों टन शुद्ध ऑक्सीजन का उत्पादन कर पर्यावरण को ‘रिचार्ज' कर रहा है। अभयारण्य में मुख्य रूप से शुष्क पर्णपाती वन और सवाना जैसे घास के मैदान हैं।

वानिकी आंकड़ों के अनुसार गांधीसागर और इसके जलग्रहण क्षेत्रों को मिलाकर यहां लगभग 1.5 करोड़ से अधिक पेड़ लगे हैं। खैर, सलाई, पलाश, तेंदू और धावड़ा जैसे पेड़ों से सजा यह जंगल बिना किसी शोरगुल या बिजली की खपत के दिन-रात एक प्राकृतिक कारखाने की तरह काम कर रहा है।

अभयारण्य का पारिस्थितिकी तंत्र

कुनी के बाद अब इसे अफ्रीकी चीती के दूमो घर के रूप में चुना गया है। अभी यहा दो नर व मदा चोता है। मई में यहां और भीले आएंगे।

यहां गिद्धों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वन विभाग के आंकड़ों 2025-26) के अनुसार यहां 7 विभिन्न प्राहियों के 1054 से अधिक गिद्ध मौजूद हैं।

जलीय क्षेत्रों के ताजा सर्वे में 139 से अधिक प्रकार के जलपधी और प्रवासी पक्षी रिकॉर्ड किए गए हैं, जो इसे एक प्रमुख 'बर्निंग साइट' बनाते हैं।

यहां मीठे पानी के कछुओं की 8 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। इसने 'इंडियन सॉफ्ट शेल' और 'फ्लैप रोल टर्टल' मुख्य हैं।

चंबल नदी का यह हिस्सा मगरमच्छों का गढ़ है। नहां सैकड़ों की संख्या में मगरमच्छ प्राकृतिक रूप से प्रजनन करते और पनपते हैं।

पांचरण की शुद्धता का संकेत देने वाले ड्रैगनफ्लई और हेमसेलस्लाई की 41 प्रजातियां यहां के जलीय किनारों पर खोजी गई हैं।

Next Story